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Leadership: अनुभवों से हो कुशल नेतृत्व

हर कार्य में दक्षता नहीं, हर स्थिति का अनुभव है लीडरों के लिए आवश्यक

प्रो. हिमांशु राय
निदेशक, आइआइएम इंदौर
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पिछली बार मैंने चर्चा की, कि एक लीडर किस प्रकार प्रभावी प्रशिक्षण से अपने अधीनस्थों को अपनी विशेषताएं और क्षमताएं पहचानने और उन्हें विकसित करने में मदद कर सकता है। इसी विषय में लीडरशिप की प्रोफेसर और इंटरनेशनल सेंटर ऑफ लीडरशिप कोचिंग की निदेशक डॉ. जूलिया मिलनर ने अपनी टेडएक्स टॉक में चर्चा की है।
उन्होंने बताया कि एक सत्र के दौरान अंतराल में प्रौद्योगिकी फर्म में एक इंजीनियर के रूप में काम करने वाला एक होनहार छात्र उनसे अपने करियर पर चर्चा करने के लिए आया। मिलनर ने उस छात्र को एक लीडर के पद कर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया, किन्तु छात्र ने भूमिका के बारे में अपनी असुरक्षाओं को साझा किया। उसका मानना था कि लीडर बनने के लिए उसे एक विविध टीम का नेतृत्व करने की आवश्यकता होगी जहां प्रत्येक सदस्य अपने कार्य में विशेषता रखेगा। क्या वह ऐसी टीम के अग्रणी के रूप में अच्छा प्रदर्शन कर पाएगा, जबकि उसे स्वयं हर कार्य में दक्ष होना पड़ेगा ताकि वह उन्हें सलाह दे सके और समाधान प्रदान कर सके।

मिलनर का मानना है कि अक्सर लोगों की धारणा होती है कि एक प्रबंधक को सलाहकार बनना पड़ता है। किन्तु हमेशा दूसरों को सलाह न देना ही बेहतर होता है, क्योंकि कई बार आपका समाधान कार्यकर्ता की मनोवैज्ञानिक भावनाओं के विपरीत होता है और इस प्रकार स्थिति अनुकूल न होने पर काम करने वाला व्यक्ति और अधिक भ्रमित हो सकता है। हो सकता है आपके अधीनस्थ को असहमत होने पर भी आपकी बात माननी पड़े, क्योंकि एक वरिष्ठ द्वारा सलाह दी गई है।


यहां आवश्यक है कि लीडर सलाहकार की बजाय प्रशिक्षणकर्ता की भूमिका निभाएं। एक सलाहकार अपने अधीनस्थ को एक दृष्टिकोण बनाने में मदद करने के लिए एक विशिष्ट उत्तर या एक दिशा प्रदान करता है। वहीं एक प्रशिक्षक आम तौर पर हर समस्या को एक अलग दृष्टि से देखता है, जो कि स्थितियों और अधीनस्थों की विशेषताओं पर आधारित होता है। वह स्थिति को प्रतिबिंबित कर, आत्मनिरीक्षण और विश्लेषण में सहायता करने के लिए समर्थन और प्रेरणा के साथ पर्याप्त समय प्रदान करता है और समस्या से निपटने के लिए दृष्टिकोण में स्पष्टता लाने में मदद करता है।

हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रशिक्षण देना सिर्फ प्रेरणा का एक अभ्यास है। यह काम की प्रकृति और उद्योग की गतिशीलता की बारीकियों को समझने के साथ-साथ कर्मचारियों की शक्ति और क्षमताओं को समझने के लिए विस्तृत अवलोकन वाला अधिक सक्रिय और कठोर दृष्टिकोण है। निस्संदेह, हर लीडर हर कार्य में पारंगत नहीं हो सकता किन्तु अंतर्निहित दर्शन, सिद्धांतों और सर्वोत्तम प्रथाओं की समझ रखने के लिए पर्याप्त अनुभव प्राप्त कर सकता है। साथ ही, लीडर को चाहिए कि वह अपने कर्मचारियों को तकनीकी और नेतृत्व द्ग दोनों क्षेत्रों में क्षमता विकास के अवसरों के साथ सीखने के अनुभव प्रदान करे।

इस प्रकार, कार्यकारी स्तर के लीडरों को नवीन प्रबंधकों के लिए प्रशिक्षण को संवेदनशील बनाने और व्यवस्थित करने पर ध्यान देने की आवश्यकता है। यह औपचारिक रूप से अपनी टीम, विभाग या डिवीजन के भीतर एक ‘कोच’ की भूमिका निभाने के समान है। कार्यकारी अधिकारी इस शैली से संगठन के अन्य प्रबंधकों और लीडरों को भी जागरूक कर सकते हैं।

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